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Omi Tales

The Chases Of Mirage

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आज बिका हूँ मेलों में गुब्बारों की तरह

 

आज बिका  हूँ मेलों में गुब्बारों की तरह

कुछ देर तक बंधा था खिलौने  वाले की छड़ी से

फिर किसी बच्चे ने जिद् की

और मैं आ गया किसी की हथेलियों में खुशियों की तरह।

आज बिका हूँ मेलों  में गुब्बारों की तरह।

 

कुछ देर रहा में उस नन्ही हथेलियों में

मेले के भीड़ में कई कन्धों से टकराया मैं,

मैं कही फुट न जाऊँ

उस बच्चे ने करीब कर लिया अपने दिल के

किसी बच्चे की माँ की तरह।

आज फिर बिका हूँ मैले में गुब्बारों की तरह।।

 

भीड़ में छूट गया धागा हाथों से

मैं उड़ चला बेहद धीरे धीरे आसमान में

अब सबने मुझे देखा सर उठा के

जैसे कोई मैं आसमान में घूम रहा हूँ टूटे तारे की तरह।

आज फिर बिका हूँ बाज़ार में किसी गुबारे की तरह।।

 

कुछ देर उडा  मैं,

कुछ दूर उड़ा  मैं

जब देखा मेरे यार का महोल्ला ऊपर से तो धीमा हो गया

किसी आशिक की मोटर साईकिल की तरह।

 

::ओमी यादव::

 

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हिसाब लगाया तो मैं घाटे में था

हिसाब लगाया तो मैं घाटे में था,

प्यार किया तो जुदाई में था,

नौकरी की तो बॉस के दबाव में था,

वसंत आया तो मैं घर में था,

सावन आया तो मैं कीचड में था,

दोस्तों से मिला तो याद आया मैं उधारी में था,

कल जब शाम मैं अकेलेपन में था,

तब सोचा और हिसाब लगाया तो मैं घाटे में था!

 

कल जो एक दोस्त आ गई घर पर,

तो पड़ोस की औरतों की बातों में था,

हर चीज़ मिली मुझको दोस्त, प्यार और पैसे जब नीन्द खुली तो पता चला मैं सपने में था,

किसी ने  कंधे पर हाथ नहीं रखा जब मैं दर्द में था,

कल जब हिसाब लगाया तो मैं घाटे में था!

 

ये धुंध सी है जो तेरे मेरे दरमियाँ

ये धुंध सी है जो तेरे मेरे दरमियाँ
ये किसी की साज़िश है या है हमारी गलतफेमियां?
तू अपनी ज़िन्दगी के किताब में पलट देती है पन्ना मेरे नाम का,
पर जब किताब ख़तम होगी तो देखना,
मिलेगा उसपर शीर्षक मेरे नाम का,
ये धुंध सी है जो तेरे मेरे दरमियाँ,
ये किसी की साज़िश है या है हमारी गलतफेमियां?

तूने जो दे दिया इस्तीफ़ा मेरे दिल को,
की अब इसकी धड़कने हिसाब करेगी तेरा,
की कितनी ले गयी और कितनी छोड़ गयी यादें रुमानियाँ,
ये धुंध सी है जो तेरे मेरे दरमियाँ,
ये किसी की साज़िश है या है हमारी गलतफेमियां?

मैं किसी भी और एक टक देखता हूँ,
आँखों के आगे होजाता है कोहरा और फिर मैं उसपार तुझे देखता हूँ,
ऐसे ही तुझे यादों में देख लेता हूँ,
ये धुंध सी है जो तेरे मेरे दरमियाँ,
ये किसी की साज़िश है या है हमारी गलतफेमियां?
#पंकज दीक्षित

जब वो आ जाए तो कहना

जब वो आ जाए तो कहना

की हम उनके हो चुके हैं

अपनी साँसों की वसीयत उसके नाम कर चुके हैं

जब वो आ जाए तो कहना,

की हम उसके हो चुके है।
कह देना उनको की उनके गीले बालो के छीटें गिरी है मेरे दिल पर

और हम सोंधी सी खुशबू हो चुके हैं,

की अब हम उनके हो चुके हैं।

वक्त की साज़िस है कि वो मिलता नही हमसे,

तुमको मुझसे मिलाने के लिए,

वक्त के पीछे हम इतने भागे तेरे लिए

की अब हम घडी की सुई हो चुके।

मेरी हाथों की ये जो लकीरें है,

वो अब हमारी सरहद हो चुके,

इसी लिए कभी हम उन तक न जा सके

और न वो हम तक आ सके,

वो आ जाए तो कहना,

हम उनके हो चुके।

हम उनके हो चुके।।

बदनाम हूँ मैं तो क्या बुरा हूँ मैं

बदनाम हूँ मैं तो क्या बुरा हूँ मैं?
मन में जो है वो कह देता हूँ तो क्या बुरा हूँ मैं?

जिसने छुरे घोंपे पीठ पे तो अगर शब्दो से उसका दिल तोड़ देता हूँ तो क्या बुरा हूँ मैं?

तुझे पता है तू ही है मेरे पतन का कारण,
अपनी बर्बादियों के किस्से में अगर ले लिया तेरा नाम तो क्या बुरा हूँ मैं?

बदनाम हूँ तो क्या बुरा हूँ मैं?
मन में जो बात है वो कह देता हूँ तो क्या बुरा हूँ मैं?

बेवजह परेशान है दिल

यूँ बेवजह परेशान है दिल,
क्या रात क्या दिन।
धड़कनो की दौड़ तेज़ है
न जाने कहाँ जाना चाहता है ये दिल।।

मेरी इन काली घेरे वाली आँखों को इश्तेहार बनाया है तेरा,
इस इश्तेहार को दिखा के पूछ रहा हूँ तेरा पता।
पहले दुनियां में सबसे अलग लगती थी,
पर अब हर चहरे में तुझको खोज रहा है ये दिल।
क्यों बेवजह परेशान है दिल,
क्या रात क्या दिन।।

बेसब्र सी है आँखें क्योंकि

बेसब्र सी है आँखें मेरी,
की न देखा तुझे अरसो से।

धून्धली सी तस्वीर तेरी
की मिट न जाये मेरी यादों से।
फिर दिखा जा अपने चहरे को,
जो न देखा मेने बरसो से,

बेसब्र सी है आँखें मेरी,
की न देखा तुझे अरसो से।

यूँ तो उतारता रहता हूँ तेरा चहरा
यादों में झांक-झांक के,
मैं सहमां हूँ इस तस्वीर में कुछ कमी देख के,
आ स्पर्श कर जा मेरी यादें अपने उँगलियों से,
जो मेंरे बालों में फेरी नही तूने बरसो से,

बेसब्र है आँखें में मेरी,
की न देखा तुझे अरसो से।

स्कूल का बस्ता

वो स्कूल का बस्ता
वही दो चिटकनी वाला स्कूल का बस्ता।

रोज सुबह भर के किताबे चल देते थे स्कूल
जिसकी हालत को देख माँ कहती थी कचरा।
हाँ वही दो चिटकनी वाला बस्ता।।

जिस बस्ते के ऊपर एक ज्योमेट्री बॉक्स रहती थी,
दो अलग से खटाल थे जिसमे हम रखते थे लंच बॉक्स और डायरी।
जब हम चलते थे, ज्योमेट्री बॉक्स बजते थे,
अब याद आया वो बस्ता?
अरे वही दौ चिटकनी वाला बस्ता,

अब हुई जब छुट्टी
चुपके से रास्ते में खोल दी दोस्त के बस्ते की चिटकनी,
हा हा हा कर के हम भागे थे और वो
संभालता रह गया वो बस्ता
सो चिटकनी वाला बस्ता।

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