बेसब्र सी है आँखें मेरी,
की न देखा तुझे अरसो से।

धून्धली सी तस्वीर तेरी
की मिट न जाये मेरी यादों से।
फिर दिखा जा अपने चहरे को,
जो न देखा मेने बरसो से,

बेसब्र सी है आँखें मेरी,
की न देखा तुझे अरसो से।

यूँ तो उतारता रहता हूँ तेरा चहरा
यादों में झांक-झांक के,
मैं सहमां हूँ इस तस्वीर में कुछ कमी देख के,
आ स्पर्श कर जा मेरी यादें अपने उँगलियों से,
जो मेंरे बालों में फेरी नही तूने बरसो से,

बेसब्र है आँखें में मेरी,
की न देखा तुझे अरसो से।

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