वो स्कूल का बस्ता
वही दो चिटकनी वाला स्कूल का बस्ता।

रोज सुबह भर के किताबे चल देते थे स्कूल
जिसकी हालत को देख माँ कहती थी कचरा।
हाँ वही दो चिटकनी वाला बस्ता।।

जिस बस्ते के ऊपर एक ज्योमेट्री बॉक्स रहती थी,
दो अलग से खटाल थे जिसमे हम रखते थे लंच बॉक्स और डायरी।
जब हम चलते थे, ज्योमेट्री बॉक्स बजते थे,
अब याद आया वो बस्ता?
अरे वही दौ चिटकनी वाला बस्ता,

अब हुई जब छुट्टी
चुपके से रास्ते में खोल दी दोस्त के बस्ते की चिटकनी,
हा हा हा कर के हम भागे थे और वो
संभालता रह गया वो बस्ता
सो चिटकनी वाला बस्ता।