इंतज़ार है तेरा इस कोफ़ी के खत्म होने तक का,
तुझे भूलने का वादा किया था पर इंतज़ार कर रहा हूँ इस बात के दोहराने तक का,
इंतज़ार है तेरा इस कोफ़ी के खत्म होने तक का।।

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रंगत तो वैसी ही है तेरे शहर की बस तेरी इत्र की महक खोई सी है,
बस उसी महक का इंतज़ार है मेरे सब्र के खत्म होने तक का।
इंतज़ार है तेरा इस कोफ़ी के ख़त्म होने तक का।।

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