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Omi Tales

The Chases Of Mirage

Ae Zindigi Zara Ruk Jaa

Ae Zindigi Zara Ruk Jaa A Beautiful Poetry by Happy Grover || Manch The Stage

 

 

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Open Mic for all Poet and StandUp Comediens

Manch-The Stage

An opportunity to showcase your talent.

 

An opportunity to showcase your talent.
Registrations are open for Poetry, Standup Comedy, Singing, Dancing and any form of art.
This is an open stage for all the artists. Please register for free.
It’s Going to be held in Gurgaon (Delhi NCR).

अंत है

अंत है मेरा मुझमे ही,

कहाँ बचा हूँ अब मैं मुझ में ही।

क्या कर रहा हूँ मैं खुद,

किस और की आवाज़ पर चल रहा हूँ,

कहाँ छोड़ आया मैं खुदको ही खुद।

अंत है मेरा मुझमे ही,

कहाँ बचा हूँ अब मैं मुझमें ही।

आज बिका हूँ मेलों में गुब्बारों की तरह

 

आज बिका  हूँ मेलों में गुब्बारों की तरह

कुछ देर तक बंधा था खिलौने  वाले की छड़ी से

फिर किसी बच्चे ने जिद् की

और मैं आ गया किसी की हथेलियों में खुशियों की तरह।

आज बिका हूँ मेलों  में गुब्बारों की तरह।

 

कुछ देर रहा में उस नन्ही हथेलियों में

मेले के भीड़ में कई कन्धों से टकराया मैं,

मैं कही फुट न जाऊँ

उस बच्चे ने करीब कर लिया अपने दिल के

किसी बच्चे की माँ की तरह।

आज फिर बिका हूँ मैले में गुब्बारों की तरह।।

 

भीड़ में छूट गया धागा हाथों से

मैं उड़ चला बेहद धीरे धीरे आसमान में

अब सबने मुझे देखा सर उठा के

जैसे कोई मैं आसमान में घूम रहा हूँ टूटे तारे की तरह।

आज फिर बिका हूँ बाज़ार में किसी गुबारे की तरह।।

 

कुछ देर उडा  मैं,

कुछ दूर उड़ा  मैं

जब देखा मेरे यार का महोल्ला ऊपर से तो धीमा हो गया

किसी आशिक की मोटर साईकिल की तरह।

 

::ओमी यादव::

 

हिसाब लगाया तो मैं घाटे में था

हिसाब लगाया तो मैं घाटे में था,

प्यार किया तो जुदाई में था,

नौकरी की तो बॉस के दबाव में था,

वसंत आया तो मैं घर में था,

सावन आया तो मैं कीचड में था,

दोस्तों से मिला तो याद आया मैं उधारी में था,

कल जब शाम मैं अकेलेपन में था,

तब सोचा और हिसाब लगाया तो मैं घाटे में था!

 

कल जो एक दोस्त आ गई घर पर,

तो पड़ोस की औरतों की बातों में था,

हर चीज़ मिली मुझको दोस्त, प्यार और पैसे जब नीन्द खुली तो पता चला मैं सपने में था,

किसी ने  कंधे पर हाथ नहीं रखा जब मैं दर्द में था,

कल जब हिसाब लगाया तो मैं घाटे में था!

 

क्या सोचते हो मेरे बारे में?

​तूने पूछा, क्या सोचते हो मेरे बारे में?

बस तुझे सोचता हूँ, अब क्या कहूँ इस बारे में?
आँख बाद कर जब तेरी आँखे सोची

तो खुद से बात हुई तेरे बारे में,

रात भर बिस्तर के सिरहाने में।

अब क्या बोलूँ उसको, जो पूछ बैठी की क्या सोचते हो मेरे बारे में।
तेरा दुपट्टा उड़े तो हवा सोचता हूँ,

तेरी पलकें झुकें तो दुआ सोचता हूँ,

तू बात करे तो राग सोचता हूँ,

लोगो को लगी नही तू ख़ास पर मैं तुझे ही देखता हूँ।

आज पूछ ही लिया है तो बता देता हूँ की मैं क्या सोचता हूँ।
तूने पूछा, क्या सोचते हो मेरे बारे में?

बस तुझे सोचता हूँ, अब क्या कहूँ इस बारे में?
कभी ठहाक्के लगाके के बोला था तूने,

अबे इस से प्यार??

पर मैं सोचता रहा रात भर इस बारे में।

आज वही लड़की पूछ रही है, क्या सोचते हो मेरे बारे में?
किसी ने कहा तेरी शादी होने वाली है बातों-बातों में,

तब से सोया नही हूँ रातो में!
तूने पूछा, क्या सोचते हो मेरे बारे में?

बस तुझे सोचता हूँ, अब क्या कहूँ इस बारे में?

ये धुंध सी है जो तेरे मेरे दरमियाँ

ये धुंध सी है जो तेरे मेरे दरमियाँ
ये किसी की साज़िश है या है हमारी गलतफेमियां?
तू अपनी ज़िन्दगी के किताब में पलट देती है पन्ना मेरे नाम का,
पर जब किताब ख़तम होगी तो देखना,
मिलेगा उसपर शीर्षक मेरे नाम का,
ये धुंध सी है जो तेरे मेरे दरमियाँ,
ये किसी की साज़िश है या है हमारी गलतफेमियां?

तूने जो दे दिया इस्तीफ़ा मेरे दिल को,
की अब इसकी धड़कने हिसाब करेगी तेरा,
की कितनी ले गयी और कितनी छोड़ गयी यादें रुमानियाँ,
ये धुंध सी है जो तेरे मेरे दरमियाँ,
ये किसी की साज़िश है या है हमारी गलतफेमियां?

मैं किसी भी और एक टक देखता हूँ,
आँखों के आगे होजाता है कोहरा और फिर मैं उसपार तुझे देखता हूँ,
ऐसे ही तुझे यादों में देख लेता हूँ,
ये धुंध सी है जो तेरे मेरे दरमियाँ,
ये किसी की साज़िश है या है हमारी गलतफेमियां?
#पंकज दीक्षित

जब वो आ जाए तो कहना

जब वो आ जाए तो कहना

की हम उनके हो चुके हैं

अपनी साँसों की वसीयत उसके नाम कर चुके हैं

जब वो आ जाए तो कहना,

की हम उसके हो चुके है।
कह देना उनको की उनके गीले बालो के छीटें गिरी है मेरे दिल पर

और हम सोंधी सी खुशबू हो चुके हैं,

की अब हम उनके हो चुके हैं।

वक्त की साज़िस है कि वो मिलता नही हमसे,

तुमको मुझसे मिलाने के लिए,

वक्त के पीछे हम इतने भागे तेरे लिए

की अब हम घडी की सुई हो चुके।

मेरी हाथों की ये जो लकीरें है,

वो अब हमारी सरहद हो चुके,

इसी लिए कभी हम उन तक न जा सके

और न वो हम तक आ सके,

वो आ जाए तो कहना,

हम उनके हो चुके।

हम उनके हो चुके।।

बदनाम हूँ मैं तो क्या बुरा हूँ मैं

बदनाम हूँ मैं तो क्या बुरा हूँ मैं?
मन में जो है वो कह देता हूँ तो क्या बुरा हूँ मैं?

जिसने छुरे घोंपे पीठ पे तो अगर शब्दो से उसका दिल तोड़ देता हूँ तो क्या बुरा हूँ मैं?

तुझे पता है तू ही है मेरे पतन का कारण,
अपनी बर्बादियों के किस्से में अगर ले लिया तेरा नाम तो क्या बुरा हूँ मैं?

बदनाम हूँ तो क्या बुरा हूँ मैं?
मन में जो बात है वो कह देता हूँ तो क्या बुरा हूँ मैं?

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